हिन्दू धर्म के अनुसार पृथ्वी का विकास
न्दू ब्रह्माण्ड विज्ञान के अनुसार सृष्टि अनादि और चक्रीय है। ब्रह्म रूप परम चेतना से विष्णु तथा फिर ब्रह्मा प्रकट होते हैं जो सृष्टि की रचना करते हैं। पंचमहाभूतों से पृथ्वी का निर्माण होता है और भगवान विष्णु वाराह अवतार लेकर पृथ्वी को जल से ऊपर उठाते हैं। जीवों का विकास क्रमशः जलचर से मानव तक होता है। युगों और मन्वन्तरों के विशाल कालचक्र में यह विकास होता रहता है। प्रत्येक चक्र के अंत में प्रलय होता है और पुनः सृष्टि प्रारम्भ होती है। यह दर्शन सृष्टि और जीवन की गहन समझ प्रस्तुत करता है। Bhaktinama एक ऐसा platform है जो आपको peace of mind के साथ worship करने में मदद करता है। Online pandit booking, online puja, pooja samagri booking और even online temple booking जैसी सेवाओं के माध्यम से यह आपको liberation की ओर हर कदम पर सहायता करता है।
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