All articles
Festival Fast Oct 11, 2026

चैत्र नवरात्रि दिवस 6 (2026) – माँ कात्यायनी

माँ कात्यायनी देवी दुर्गा का छठा स्वरूप हैं, जिनकी पूजा चैत्र नवरात्रि के छठे दिन की जाती है। उन्हें एक उग्र और वीर योद्धा देवी के रूप में जाना जाता है, जिनका अवतार बुराई का नाश करने के लिए हुआ था। माँ कात्यायनी सिंह पर सवार होती हैं, उनके हाथों में तलवार और कमल होता है, और वे अपने भक्तों को साहस, सुरक्षा और आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

परिचय: चैत्र नवरात्रि का छठा दिन शक्ति, साहस और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। जैसे-जैसे आध्यात्मिक यात्रा गहराती है, यह दिन भक्तों को भय और नकारात्मकता को दूर करने की प्रेरणा देता है। यह दिन माँ कात्यायनी को समर्पित होता है, जो देवी दुर्गा का छठा स्वरूप हैं। भक्ति नाम के अनुसार, यह दिन आंतरिक शक्ति और अन्याय के खिलाफ लड़ने के साहस का प्रतीक है, जो भक्तों को धर्म और आत्मविश्वास की ओर मार्गदर्शन करता है। Bhaktinama पर हम न केवल आध्यात्मिक ज्ञान साझा करते हैं, बल्कि आपकी भक्ति यात्रा को आसान बनाने के लिए modern और accessible सेवाएँ भी प्रदान करते हैं, जैसे online pandit booking, online temple booking और puja samagri online ordering। तिथि, नक्षत्र एवं पूजा मुहूर्त (2026): साल 2026 में चैत्र नवरात्रि का छठा दिन 24 मार्च, मंगलवार को पड़ता है, जिसे षष्ठी तिथि के रूप में मनाया जाता है। इस दिन चंद्रमा भरणी नक्षत्र में रहता है और बाद में कृत्तिका नक्षत्र में प्रवेश करता है। पूजा के लिए शुभ समय प्रातः लगभग 06:00 बजे से 09:00 बजे तक है, जबकि अभिजीत मुहूर्त लगभग 12:00 बजे से 12:50 बजे तक रहता है। संध्या पूजा का समय लगभग 06:00 बजे से 07:40 बजे तक होता है। ये समय स्थान के अनुसार थोड़ा बदल सकते हैं। Bhaktinama के माध्यम से ये सभी विधियाँआसान हो जाती हैं, जहाँआप online pandit booking, temple booking, puja samagri ordering और पर्णू र्णमार्गदर्ग र्शनर्श प्राप्त कर सकतेहैं। दिन 6: माँ कात्यायनी की पूजा: माँ कात्यायनी को शक्ति और वीरता के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। उनके चार हाथ होते हैं—दो हाथों में तलवार और कमल होता है, जबकि अन्य दो हाथ अभय (रक्षा) और वरद (आशीर्वाद) मुद्रा में होते हैं। उनका वाहन सिंह है, जो निडरता का प्रतीक है। भक्ति नाम के अनुसार, माँ कात्यायनी की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, नकारात्मकता का नाश होता है और शक्ति व सफलता की प्राप्ति होती है। उन्हें विशेष रूप से साहस और सुरक्षा की कामना करने वाले भक्त पूजते हैं। Bhaktinama Services: आपका व्रत आसान और दिव्य बनाएं आज की तेज़-रफ्तार जीवनशैली में पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करना कठिन हो सकता है। Bhaktinama भक्ति और सुविधा को जोड़कर इस अंतर को दूर करता है, जिससे आपका कामदा एकादशी व्रत सरल और सहज बन जाता है। Online Temple Booking: घर बैठे ही प्रसिद्ध मंदिरों में darshan और विशेष पूजा बुक करें। Online Pandit Booking: अनुभवी और verified पंडितों को घर पर पूजा, व्रत कथा और अनुष्ठान के लिए आसानी से बुलाएँ। Puja Samagri Ordering: सभी आवश्यक पूजा सामग्री—जैसे धूप, दीप, फल और अन्य सामग्री—घर तक प्राप्त करें। Personalized Guidance: चरण-दर-चरण मार्गदर्शन के साथ सही तरीके से व्रत करने में सहायता पाएं। Bhaktinama के साथ भक्ति अब समय, दूरी और संसाधनों से सीमित नहीं रहती—यह सभी के लिए सुलभ हो जाती है। माँ कात्यायनी की कथा: हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, माँ कात्यायनी का जन्म ऋषि कात्यायन की कठोर तपस्या के फलस्वरूप हुआ था। उन्होंने देवी दुर्गा से प्रार्थना की थी कि वे उनकी पुत्री के रूप में जन्म लें। माँ कात्यायनी ने महिषासुर नामक असुर का वध करने के लिए अवतार लिया, जो अपने वरदान के कारण अत्यंत शक्तिशाली और अजेय हो गया था। अपने अद्भुत बल और दिव्य अस्त्र-शस्त्रों से माँ कात्यायनी ने महिषासुर का वध किया और संसार में पुनः शांति और संतुलन स्थापित किया। यह कथा बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। भक्ति नाम के अनुसार, माँ कात्यायनी की भक्ति करने से व्यक्ति अपने आंतरिक और बाहरी संघर्षों पर विजय प्राप्त कर सकता है। पूजा विधि: इस दिन भक्त प्रातः जल्दी उठकर स्नान करते हैं और पूजा स्थल को शुद्ध करते हैं। माँ कात्यायनी को शहद अर्पित किया जाता है, जिससे जीवन में मधुरता और सकारात्मकता आती है। भक्त लाल फूल, फल और मिठाइयाँ भी अर्पित करते हैं। दीपक जलाकर मंत्रों का जाप किया जाता है और व्रत रखा जाता है। कई लोग सात्त्विक भोजन ग्रहण करते हैं और मन, वचन तथा कर्म से शुद्धता बनाए रखते हैं। भक्ति नाम के अनुसार, सच्चे मन से की गई पूजा भय को दूर करती है और जीवन में साहस व आत्मविश्वास भरती है। माँ कात्यायनी के मंत्र: बीज मंत्र: “ॐ देवी कात्यायन्यै नमः” ध्यान मंत्र: “चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥” इन मंत्रों का जाप करने से शक्ति, सुरक्षा और सफलता की प्राप्ति होती है। Bhaktinama की modern सेवाओं—जैसे online temple booking, pandit booking और puja samagri delivery—के साथ आपकी भक्ति यात्रा और भी सरल और संतोषजनक बन जाती है। Bhaktinama से जुड़े रहें और भक्ति को सबसे आसान और प्रामाणिक रूप में अनुभव करें। आध्यात्मिक महत्व: नवरात्रि का छठा दिन आज्ञा चक्र (तीसरी आंख) से जुड़ा होता है, जो अंतर्ज्ञान, ज्ञान और स्पष्टता का प्रतीक है। माँ कात्यायनी की पूजा से आंतरिक दृष्टि जागृत होती है और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है। भक्ति नाम के अनुसार, यह दिन भक्तों को अपनी आंतरिक शक्ति पर विश्वास करने और निर्भय होकर आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। भक्तिनामा के साथ सभी प्रकार की पूजा के लिए अनुभवी पंडित ऑनलाइन बुक करें – आसान, विश्वसनीय और शुद्ध।