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Oct 11, 2026
चैत्र नवरात्रि दिवस 5 (2026) – माँ स्कंदमाता
पौराणिक मान्यता के अनुसार माँ स्कंदमाता, माता पार्वती का ही स्वरूप हैं। जब तारकासुर नामक असुर ने अत्याचार किया, तब भगवान कार्तिकेय ने उसका वध किया। माँ स्कंदमाता ने अपने पुत्र का पालन-पोषण कर उसे इस योग्य बनाया।
परिचय:
चैत्र नवरात्रि का पाँचवाँ दिन मातृत्व, करुणा और आशीर्वाद का प्रतीक है। जैसे-जैसे साधना आगे बढ़ती है, यह दिन जीवन में शांति, ज्ञान और स्नेह का संचार करता है। यह दिन माँ स्कंदमाता को समर्पित है, जो देवी दुर्गा का पाँचवाँ स्वरूप हैं। भक्तिनामा के अनुसार यह दिन प्रेम और सेवा की भावना को दर्शाता है।
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तिथि, नक्षत्र और पूजा मुहूर्त (२०२६):
वर्ष २०२६ में चैत्र नवरात्रि का पाँचवाँ दिन २३ मार्च, सोमवार को पड़ता है और इसे पंचमी तिथि के रूप में मनाया जाता है। इस दिन चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में स्थित रहता है और बाद में भरणी नक्षत्र में प्रवेश करता है। पूजा का शुभ समय प्रातः लगभग ०६:०० बजे से ०८:५० बजे तक माना जाता है, जबकि अभिजीत मुहूर्त लगभग १२:०० बजे से १२:५० बजे तक रहता है। इसके अतिरिक्त सायंकाल ०५:५० बजे से ०७:३० बजे के बीच भी पूजा की जा सकती है। ये सभी समय माँ स्कंदमाता की उपासना के लिए उपयुक्त माने जाते हैं।
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माँ स्कंदमाता की उपासना:
माँ स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता हैं। वे अपने पुत्र को गोद में लिए हुए कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं और सिंह पर सवार होती हैं। उनके चार हाथ होते हैं, जिनमें वे कमल धारण करती हैं और भक्तों को आशीर्वाद देती हैं।
भक्तिनामा के अनुसार माँ स्कंदमाता की उपासना से ज्ञान, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। उनकी कृपा से अज्ञान दूर होता है और जीवन में सही मार्ग मिलता है।
कथा:
पौराणिक मान्यता के अनुसार माँ स्कंदमाता, माता पार्वती का ही स्वरूप हैं। जब तारकासुर नामक असुर ने अत्याचार किया, तब भगवान कार्तिकेय ने उसका वध किया। माँ स्कंदमाता ने अपने पुत्र का पालन-पोषण कर उसे इस योग्य बनाया।
यह कथा मातृत्व की शक्ति और त्याग को दर्शाती है। भक्तिनामा के अनुसार उनकी भक्ति से जीवन में सफलता और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
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पूजा विधि:
इस दिन भक्त प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और पूजा स्थान को सजाते हैं। माँ स्कंदमाता को केले, फल और मिठाई अर्पित की जाती है। दीप प्रज्वलित कर पुष्प अर्पित किए जाते हैं और श्रद्धा के साथ मंत्रों का जाप किया जाता है। कई भक्त व्रत रखते हैं और सात्विक भोजन करते हैं।
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मंत्र:
“ॐ देवी स्कंदमातायै नमः” बीज मंत्र है। “सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी” ध्यान मंत्र है। इन मंत्रों का जाप करने से ज्ञान, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।
आध्यात्मिक महत्व:
नवरात्रि का पाँचवाँ दिन विशुद्ध चक्र से संबंधित है, जो वाणी, शुद्धता और सत्य का प्रतीक है। माँ स्कंदमाता की उपासना से विचार शुद्ध होते हैं और अभिव्यक्ति में स्पष्टता आती है।
निष्कर्ष:
चैत्र नवरात्रि का पाँचवाँ दिन माँ स्कंदमाता को समर्पित है, जो मातृत्व, करुणा और आशीर्वाद का प्रतीक हैं। उनकी उपासना से जीवन में शांति, ज्ञान और समृद्धि आती है। भक्तिनामा इस दिन को भक्ति से ज्ञान की ओर बढ़ने का महत्वपूर्ण चरण मानता है।
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