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Festival Fast Oct 11, 2026

अक्षय नवमी

अक्षय नवमी, कार्तिक शुक्ल नवमी का पावन पर्व, प्रकृति, भक्ति और समृद्धि का उत्सव है। इस दिन आँवले के वृक्ष, जिसे धरती का कल्पवृक्ष कहा गया है, की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन किया गया हर पुण्य, हर संकल्प और हर उपवास अक्षय अर्थात कभी कम न होने वाला हो जाता है। सूर्य देव और लक्ष्मी स्वरूप आँवला वृक्ष की आराधना शरीर, धन, भाग्य और आध्यात्मिक उन्नति का वरदान देती है।

अक्षय नवमी (अगहन नवमी) – कल्‍याण और कल्‍पवृक्ष का सनातन पर्व भूमिका हमारी संस्कृति में तिथियाँ केवल कैलेंडर पर अंक नहीं होतीं। वे आकाश में लिखे हुए वे दैवीय अध्याय हैं जो हमें बताती हैं कि कब प्रकृति मुस्कुराती है, कब देव ऊर्जा पृथ्वी पर उतरती है, और कब श्रद्धा का एक दीपक भाग्य के अंधेरों को उजाले में बदल देता है। ऐसा ही एक पवित्र अवसर है: अक्षय नवमी जिस दिन पूजा जाता है धरती पर अवतरित कल्पवृक्ष स्वरूप आँवला वृक्ष (Amla Tree) को। यह विश्वास है कि इस दिन किया गया हर पुण्य, हर संकल्प, हर उपवास अक्षय अर्थात कभी समाप्त न होने वाला हो जाता है। अक्षय नवमी क्या है? कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व धार्मिक, आध्यात्मिक, प्राकृतिक और वैज्ञानिक महत्त्व का संगम है। यह दिन सूर्य देव और आँवला वृक्ष (धात्री वृक्ष) की पूजा का उत्सव है। मान्यता है: आँवले की छाया में बैठकर किया गया हर उपवास, हर जप, हर दान… अनंत फल देता है। इतिहास की जड़ों में अक्षय नवमी पुराण कहते हैं: जब समुद्र मंथन हुआ और अमृत प्रकट हुआ तभी धरती पर उतरा कल्पवृक्ष और उसी दिव्य कल्पवृक्ष का रूप है हमारा आँवला। वेदों में आँवले को कहा गया: अमृतफल जिसके दर्शन से आयु बढ़ती है और सेवन से शरीर रोगों से मुक्त होता है। कहा जाता है कि: यही दिन है जब सत्ययुग का आरंभ माना जाता है। तो यह पर्व केवल पेड़ों का ही नहीं धर्म, सत्य और नवजीवन का उत्सव है। कौन और क्यों मनाता है यह पर्व? लक्ष्मी और विष्णु के भक्त सूर्योपासक व्रत रखने वाले परिवार की समृद्धि की चाह रखने वाले सब इस दिन श्रद्धा से आँवले की पूजा करते हैं और कहते हैं: “हे धात्री देवि, हे कल्पवृक्ष, हमारे जीवन में कभी कमी न आने देना।” यह दिन विशेष रूप से धन, स्वास्थ्य, संतान और सौभाग्य की कामना से मनाया जाता है। आँवला वृक्ष: धरती का कल्पवृक्ष आँवला केवल फल नहीं, औषधि, ऊष्मा, जीवन और आयुर्वेद का सम्राट है। चरक संहिता में लिखा है: “दुनिया में आँवले से श्रेष्ठ फल कोई नहीं।” क्योंकि: यह प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है आयु बढ़ाता है त्वचा, आंखों और पाचन के लिए अमृत है शरीर से विषैले तत्व हटाता है आयुर्वेद में इसे कहा गया: रसायन यानी वह जो शरीर की कोशिकाओं को पुनर्जीवित कर दे। इसलिए इसे काया कल्प वृक्ष भी कहते हैं। पूजा की विधि: परिक्रमा, व्रत और भक्ति सूर्योदय से पहले स्नान कर सज्जित होकर व्रती जाते हैं आँवले के वृक्ष के पास। दूध, जल, कुमकुम, अक्षत से अभिषेक दीप और धूप अर्पित वृक्ष की 7 या 21 बार परिक्रमा वृक्ष की छाया में ही भोजन और प्रसाद कहा जाता है: “आँवले की छाया में अन्न भी प्रसाद बन जाता है और हर निवाला भाग्य बनकर साथ चलता है।” परिवार साथ बैठकर भोजन करता है जिससे प्रेम, एकता और सद्भाव बढ़ता है। सूर्य देव का विशेष महत्व कार्तिक का महीना सूर्य को प्रिय है। इस दिन सूर्य की उपासना आयु, तेज, धन और स्वास्थ्य देती है। श्रद्धा से कहा जाता है: “सूर्य बिना जीवन अधूरा है और सूर्य बिना अन्न।” विज्ञान और प्रकृति का चमत्कार अक्षय नवमी वैज्ञानिक रूप से भी अद्भुत है: इस समय आँवला पोषक तत्वों से पूर्ण होता है सूर्य की ऊर्जा शरीर में विटामिन D सक्रिय करती है सामूहिक भोजन मानसिक तनाव घटाता है पेड़ों से जुड़ाव इको-हीलिंग प्रदान करता है प्रकृति और मानव का अटूट प्रेम इस दिन स्पष्ट दिखाई देता है। सांस्कृतिक विविधताएँ कुछ जगह इसे धात्री नवमी कहा जाता है कहीं आँवला नवमी उत्तर प्रदेश और बिहार में सूर्य और लक्ष्मी पूजा का संगम बुंदेलखंड में कल्पवृक्ष महोत्सव कहीं इसे महाभारत के पांडवों की पूजा से जोड़ते हैं तो कहीं आदित्य भक्ति से। आध्यात्मिक संदेश अक्षय नवमी हमें सिखाती है: प्रकृति केवल संसाधन नहीं हमारा परिवार है वृक्ष केवल लकड़ी नहीं दिव्य आशीर्वाद हैं दान केवल वस्तु नहीं पुण्य है जो अनंत बन जाता है यह दिन कहता है: “जिस जीवन में पेड़ हैं वहाँ सुख अटूट है वहाँ लक्ष्मी का वास है।” निष्कर्ष अक्षय नवमी केवल पूजा नहीं जीवन में प्रकृति को वह स्थान देने की याद है जो कभी कम नहीं होना चाहिए। इस दिन किए गए कर्म कभी समाप्त नहीं होते वे अक्षय बनकर हमें स्वास्थ्य, समृद्धि और दिव्यता देते रहते हैं। आओ संकल्प लें केवल पूजा नहीं पेड़ भी लगाएँ और इस धरती को सदैव अक्षय बनाएँ। भक्तिनामा के साथ सभी प्रकार की पूजा के लिए अनुभवी पंडित ऑनलाइन बुक करें – आसान, विश्वसनीय और शुद्ध।